आपके बच्चों को नर्सरी राइम्स कैसे सिखाई जाए
मेरा बेटा सात साल का है,फिर भी रातको सोते समय उसे मेरी थोड़ी सी मदद की ज़रूरत होती थी और जो बात सबसे पहले मेरे दिमाग़ में आई वह थी .राइम्स का,जिसे हम सभी ने साथ में सीखा.
. वह सुनकरसीखने वालों में से एक था. और इसलिए वह दिनभर अपना पसंदीदा संगीत सुनते हुएसब कुछ जल्दी सीखता था.
शुरुआत में मैं कुछ सी .डी खरीद लाई थी जिसे बजाने पर वह सिर्फ़ सुनता था .नर्सरी राइम्स सबसे अच्छी कहानियाँ होती हैं जिससे बच्चे अपनेआप को जुड़ा हुआ अनुभव करते हैं . वह छोटी और सुरीली होतीं हैं. माँ बाप अपने बच्चे को नर्सरी राइम्स सुना रहे होतें हैं उसी समय सबसे बड़ी समस्या यह उठती है की इनमे से कुछ बच्चों को किस प्रकार सिखाई जाएँ.
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जब आप उन्हे नर्सरी राइम्स सिखा रही होतीं हैं, उससमय मम्मियाँ यह निश्चित कर लें कि, वह उन्हे भली प्रकार से आतीं हों. अन्यथा आप इसके लिए यू ट्यूब. कॉम या गूगल. कॉम की सहयता ले सकतीं हैं. ज़्यादातर नर्सरी राइम्स की अपनी ही मीठी तुकबंदी और सुर होता है. नर्सरी राइम्स गाते समय आपका व्यवहार ख़ुशगवार होना ज़रूरी है ताकि आप बता सकें कि यह सब सीखना कितना मज़ेदार हो सकता है.
जो बच्चे देखकर सीखते हैं, उनके लिए रचनात्मक बानिए और राइम का कोई चरित्र बनाइए ;जैसे हंप्टी डंप्टी, या ब्लॅक शीप. इसके अलावा आप सॉक्स या फिंगरपप्पेट बनाने की कोशिश भी कर सकती हैं ताकि उनकी कल्पना का विस्तार हो सके.
**क्रिया और भाव**यह दोनों उतने ही ज़रूरी हैं जितनी कि कविता की सही लय. उचित असर के लिए कविता की लेय पर नाटक करिए. हाथ घुमाए (ट्विंकल ट्विंकल),आँखें नचाईए,शरीर को लहराईए(जॅक आंड जिल)और उंगलियों पर गिनिए (बाबा ब्लॅक शीप). यह क्रिया और भाव बच्चे के आँख और हाथ के तारतम्य का भी उचित विकास करते हैं.
कविता बच्चे में पढ़ने की आदत का विकास करने में भी बहुत सहायक होती हैं. घर में रंगीन चित्र वाली कविताओं की किताब लाइए और उन्हे पढ़कर सुनाए. सिर्फ़ याद रखिए कि आपको बहुत सा संयम रखना होगा ,ताकि आप अभिभावक होने का मनोरंजक अनुभव कर सकें.
बच्चे को अपने आप पूरा वाक्य कविता का पढ़कर समझने दीजिए. यहाँ तक कि वाक्य समाप्तकरने के लिए उन्हेआपके उपर निर्भर नहीं होने दीजिए.
नर्सरी राइम्स पढ़ने से उनकी यादश्त तेज़ होती है. इसलिए नहाते समय या खाते समय आप बच्चे के साथ मिलकर गाइए. बार बार एक ही चीज़ करने से उनकी यादश्त तेज़ होती है साथ ही लंबे समय तक उनके दिमाग़ पर अंकित हो जाती है.
सभी माताओं के लिए सुझाव है कि, अपने बच्चों की खूबियों को सबके सामने ना दर्शाएं जब तक कि वह स्वयं ही इसके लिए तय्यार ना हों. यदि वह नहीं कहते हैं तो उनकी इच्छा का सम्मान कीजिए. अंत में अपने बच्चे की तारीफ कीजिए भले ही उसने कोशिश ही की हो.
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