क्या आप एक बातूनी को बड़ा कर रहे हैं?
आराव एक दो साल से कुछ बड़ा बच्चा था और मुश्किल से बोलता था . जब उसने कुछ शब्द बोलना शुरू किए तो मैने शांति की साँस ली. परंतु जब हम लोग उसके बीच में लगातार बोलने के कारण अच्छे से कभी बातचीत नहीं कर पा रहे थे तो मैं फिर से चिंतित हो गई थी. अब यह मासूमियत नहीं थी. मुझे पता नहीं हम लोग इस स्तिथि तक कैसे पहुँचे. बाद में मुझे पता चला कि वह हमारी परिवारिक बातें अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से बांट रहा था.
यह कैसी विडंबना है कि, हम माता पिता अपने बच्चों को सबसे ज़्यादा असामान्य परिस्थितियों में जवाब देने, बात करने, गाने या अभिनय करने के लिए मजबूर करते हैं. और जब वह बड़े होते हैं तो उनकी यही आदत हमारे लिए कष्टप्रद बन जाती है और हम उन्हे चुप करने की कोशिश करते हैं. यदि आप इनमें से किसी भी स्तिथि से गुज़रे है तो यकीन मानिए आप एक बातूनी को बड़ा कर रहें हैं.
बहुत आरंभ से ही बच्चों को यह सिखाना आवशयक होता है कि कब बात करनी है और कब नहीं करनी है .बड़ों की बातचीत के बीच में बोलना बालसुलभ भोलापन लग सकता है परंतु कभी कभी यही बात आपको खिजा भी देती है.
और भी बहुत से रास्तें होते हैं जिनसे आप अपने बच्चे को चुप रहना या व्यवहार में ठहराव लाना सिखा सकते हैं. और इनमे से एक है टीवी या गॅडजेट्स की आवाज़ के बिना शांतिपूर्ण परिवारिक समय. आप इस समय का उपयोग एक दूसरे से बोलने या सुनने के लिए कर सकते हैं. आपस में यह बता सकते हैं की आज का आपका दिन बिना एक दूसरे को टोके कैसा गुज़रा.
मैं भी कई बार शर्मनाक पलों का सामना कर चुकी हूँ, जब मेरे बच्चे ने कोई परिवारिक रहस्यों को खुले में सबके सामने बोल दिया हो. इसलिए हमने एक ख़ुफ़िया संकेत की स्थापना की. यह एक प्रकार से बच्चे के लिए मूक चेतावनी और आपके लिए मित्रों और परिवार के सामने शर्मिंदगी से बचने का उपाय था.
आख़िर में हमेशा अपने बच्चों को ध्यान से सुनिए. जब भी वह स्कूल या खेल के मैदान से वापस आते हैं उन्हे दिल खोलकर बोलने दीजिए. इनमे से कई कहानियाँ आप कई बार सुन चुकी होंगी फिर भी आप धैर्य रखिए. बातूनी व्यवहार बच्चों में कुछ समय के लिए होता है जो जल्दी ही समाप्त भी हो जाता है.
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