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रंगो का मनोरंजन बच्चो के संग

रंगो का मनोरंजन बच्चो के संग

चित्रकला और रंगो से प्रेम बच्चो मे सहजत: आ जाता है | क्रेयान्स और पेन्सिल को पकड़ना उन्हे बेहद पसंद होता है और आमतौर पर उनकी पहली कलाक्रति घर की दीवाल पर ही होती है| इस क्रिया से बच्चे की कल्पनात्मक शक्ति बढ़ती है और उसे खुद को अभिव्यक्त करने मे मदद मिलती है | ऐसे ही एक घटना मे मेरे बेटे ने सूरज को कला रंग दिया, मैने पूछा तो बोला “मुझे पापा की याद आ रही है” (मेरे पति तब घर पर नही थे) और उसे बुरा लग रहा था | यह एक तरीका होता है खुद को व्यक्त करने का और इससे उनकी कल्पना और कला ज़्यादा बेहतर होती है|

शुरूवात बच्चे को क्रेयान्स /पेन्सिल कलर्स को पकड़ना सिखाने से करें| यह ध्यान रखें की यह नुकीली ना हो ताकि बच्चे को चोट ना लगे | बाज़ार में गैर विषैले क्रेयान्स को खोजे |

प्रायत: बच्चे को भिन्न प्रकार के रंगो से रंग भरना या उन्हे चलना सिखाए | उन्हे सीधी लाइन्स बनाना सिखाए , खाली पेपर पर भिन्न रंगो से गोल चित्र बनाने को कहें | नियमित अभ्यास से वे अलग अलग प्रकार के आकार बनाना सीखेंगे और धीरे धीरे अनियमित क्रेयान प्रक्रिया ख़तम हो जाएगी|

उन्हे आस पास की चीज़ों से रूबरू करवायें जैसे पेड़, घर और जीव जिनसे वो खुद को जोड़ सके और उन्हे रंग चुनने मई मदद करें | बच्चे को अगर रेखा के भीतर ना रह पायें तो चिंता ना करें | ज़्यादा ज़रूरी यह है की वह भिन्न चीज़ो के रंगो को पहचान पायें जैसे पौधे हरे होते है और सूरज पीला है |

बाज़ार में अलग अलग प्रकार की रंग करने की पुस्तक उपलब्ध है| कुछ विषय को चुन लें जैसे फूल , परिवहन , पशु इत्यादि | इसे मनोरंजन के तौर पर करें ना की एक नियमित क्रिया के तरह जो की दिन के एक निर्धारित समय पर हो | जब वो बड़े हो जायें, तो उन्हे पानी के पेंट्स और ब्रश से प्रयोग करवायें | याद रहे यह बहुत गंदा होगा पर मनोरंजक होगा |

सबसे मौलिक बात जब आप अपने बच्चे को चित्र बनाना सिखायें तो वह यह है की आप उन्हे अपने आस पास की दुनिया पर गौर करें और उसे अपने तरीके से रंगो से व्यक्त करें | उनकी चित्रकला को दीवार पर लगायें और उनकी छोटी छोटी कलाकृति को सराहे |

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